Wednesday, June 24, 2026
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रामनगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दोन क्षेत्र के करीब 15 000 थारू- आदिवासी मतदाताओं ने किया वोट का बहिष्कार

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बेतिया मोहन सिंह।
रामनगर प्रखंड के दोन क्षेत्र में ग्रामीणों ने विकास के मांग को लेकर वोट बहिष्कार किया है। इसकी घोषणा ग्रामीणों ने लगभग दो सप्ताह पहले ही कर दिया था। जिसके बाद प्रशासन और नेताओ ने प्रयास भी किया और प्रशासन को उम्मीद थी कि मतदान के दिन ग्रामीण मान जायेंगे। क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने भी गांव के कुछ सम्मानित लोगो से इस संबंध में बात किया था और आश्वासन भी दिया। लेकिन ग्रामीण इसके वावजूद भी आज मतदान करने नहीं आए है। आप देख सकते है की मतदान केंद्र पर जो भी चुनाव कार्य में प्रतिनियुक्त कर्मी है वे मतदान की तैयार कर लोगो की प्रतीक्षा कर रहे है लेकिन अभी तक एक भी वोट नहीं डाले गए है। इस संबंध में ग्रामीणों ने अपना बिचार भी दिया है कि आखिर वे क्यों मतदान का वहिष्कार कर रहे है। इनका कहना है की आजादी के 78 वर्षो बाद भी दोन क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से वंचित है । यहां चार महीने बरसात के समय कहीं आना जाना बंद हो जाता है बच्चे, महिलाये, बीमार गोद में ही दम तोड़ देते है। हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते है । आज भी बीमार को ले जाने के लिए चारपाई का सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए हमने सबको चिट्ठी- पत्री
भी लिखा है। जब चुनाव आता है तो सभी दलों के नेता आते है और आश्वासन देकर हमारा वोट लेकर चले जाते है। जब हमको वोट देने का अधिकार मिला है, तो हमको वोट वहिष्कार करने का भी अधिकार है। इसलिए हमलोग वोट वहिष्कार किए है। आज सुबह में भी कुछ बड़े नेताओं का दल भी इनसे मिलकर वोट डालने के लिए मान मान -उवल किए है । लेकिन अभी तक वोट डालने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
यहां लगभग 15000 ( पंद्रह हजार वोटर है ) इनकी समस्या यह है की प्रखंड मुख्यालय तक जाने के लिए भी इनको कोई पक्की सड़क आज तक नहीं बन सकी है । स्वस्थ्य सुविधा हो या शिक्षा सब का बुरा हाल है। यहां की 80% आबादी थारू व उरांव जनजातीय समुदाय की है। जो कभी लाल आतंक से भी पीड़ित रहे हैं। तो कभी दस्यू सरदारों का कहर भी इन लोगो ने झेला है। इन सभी समस्याओ से झूझने वाला यह समुदाय आज अपने हक और अधिकार के लिए लोकतंत्र के महापर्व में खुद को वंचित करने का निर्णय लिया है। जो पूरी व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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