Saturday, August 1, 2026
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पूस की रात ठंड में ठिठुरते गरीबों के कांपते शरीर पर कम्बल ओढ़ाने पर उनके चेहरे की राहत और आंखों की चमक, मेरी मदद से ज्यादा बहुमूल्य:गरिमा

पूस की कड़क ठंड में ठिठुर रहे सैकड़ों असहाय गरीबों को अपने निजी कोष से कम्बल ओढ़ाते अपने चेहरे पर चमक लिए बोलीं महापौर,

सघन शहरी क्षेत्र में आधी रात तक घूम घूम कर सैकड़ों गरीब असहाय महिला-पुरुषों को कम्बल ओढ़ाकर मदद पहुंचाने का आधी रात के बाद तक निजी स्टॉफ के साथ चलाया अभियान,

बेतिया मोहन सिंह।

महापौर गरिमा देवी सिकारिया के द्वारा गुरुवार को देर शाम से आधी रात के बाद तक सैकड़ों गरीब असहाय महिला पुरुषों के बीच अपने निजी कोष से निःशुल्क ओढ़ाने और बांटने का अभियान चलाया गया।
नगर निगम के सघन शहरी क्षेत्र में यथा रेलवे स्टेशन, स्टेशन चौक, हरिबाटिका चौक, बस स्टैंड, कलेक्ट्रेट चौक, मोहर्रम चौक, तीन लालटेन चौक, सोवा बाबू चौक, मीना बाजार आदि शहर के मुख्य स्थानों पर दल बल सहित पहुंचकर सैकड़ों गरीब असहाय महिला-पुरुषों को कम्बल ओढ़ाकर मदद पहुंचाने का आधी रात के बाद तक अपने निजी स्टॉफ के साथ महापौर श्रीमती सिकारिया के द्वारा अभियान चलाया गया। इस मौके पर मीडिया कर्मियों से बातचीत में महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने कहा कि पूस की रात में ठंड में ठिठुरते गरीबों के कांपते शरीर पर कम्बल ओढ़ाने के बाद उनके चेहरे की राहत और खुशी की पीड़ितजन के आंखों की चमक मेरी इस छोटी मदद से कई गुना ज्यादा बहुमूल्य है।
क्योंकि पूस की हाड़ कंपाती ठंड में जब किसी गरीब लाचार के कांपते शरीर पर मैं कम्बल ओढ़ाती हूं, तो केवल ठंड नहीं मिटती बल्कि उनकी आत्मा को भी सुकून मिलता है। किसी के चेहरे पर उभरती राहत और आंखों की चमक ही, मेरे इस अदना दान की सबसे बड़ी पूंजी है।

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