


57वां स्थापना दिवस पर पार्टी का विस्तार और मजबूत करने का लिया संकल्प
बेतिया मोहन सिंह।
भाकपा माले ने गोपालगंज पार्टी जिला कार्यालय सहित जिलें के खजूरी (कुचायकोट), दगंसी ( बरौली), लाढ़पुर (फुलवरिया) छितौना, मथौली (विजयीपुर) पंचदेवरी और भोरे पार्टी कार्यालय पर झंडातोलन कर57 वां स्थापना दिवस मनाया।
इस अवसर पर भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य रविन्द्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि जब हम अपनी पार्टी भाकपा माले का 57 वां स्थापना दिवस मना रहे हैं. तब हम भारत के लोगों में असंतोष के नए चिन्ह देख सकते हैं. पूरे देश में लाखों भारतीयों को अपने वोट के अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, मजदूरों ने नयी श्रम संहिताओं के खिलाफ, खास तौर पर काम के अधिक घंटे थोपे जाने के खिलाफ, प्रतिटोध खड़ा हो रहा है. अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते के भारतीय कृषि पर विनाशकाटी प्रभाव होंगे और कृषि पर साम्राज्यवादी कब्जे के खिलाफ किसान, संघषों के एक और निर्णायक दौर की तैयारी कर रहे हैं. मनरेगा कानून को खत्म किये जाने के बाद ग्रामीण रोजगार गारंटी के मसले ने नए सिरे से ध्यान आकर्षित किया है. यू जी सी रेगुलेशन पर रोक लगाए जाने से, सामाजिक न्याय की चिंगारी को नए सिरे से सुलगा दिया है.
भाकपा माले के वरिष्ठ नेता रामनरेश राम ने कहा कि भाकपा (माले), नक्सलवाड़ी के किसान विद्रोह की ज्वाला में उपजी पार्टी है. एक ऐसी पार्टी जिसने समूचे कम्युनिस्ट आंदोलन की क्रांतिकारी विटासत को गर्व के साथ ग्रहण किया और तमाम मुश्किलों में भी जनता की शक्ति, साहस और पहलकदमी तो ऊर्जा ग्रहण करते हुए खुद को निरंतर नवीनीकृत किया. आगे भी करेगी 57वां स्थापना दिवस पर पार्टी का विस्तार और मजबूत करने का संकल्प लिया।
भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुभाष सिंह कुशवाहा ने कहा कि आज जब फासीवादी मोदी सरकार साम्राज्यवाद के आशीर्वाद से , राष्ट्र और उसकी जनता के साथ दमन और छल कर रहे रहे हैं और कम्युनिस्टों को बदनाम कर रहे हैं तो भाकपा (माले) कम्युनिस्ट परचम उठा कर सही मायनों में संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के संघर्ष की अगुवाई करेगा और हर संभव तरीके से भाकपा (माले) का विस्तार करेंगा , उसे मजबूत करें ताकि हमारे महान शहीदों के सपनों को साकार किया जा सके और हमारी महान जनता की सेवा की
दुनिया भर के शासक वर्ग समय-समय पर कम्युनिस्ट आंदोलन को मर्सिया पड़ते रहे हैं पर विजय के उन्माद वाली ऐसी तमाम घोषणाओं को धता बताते हुए. कम्युनिष्ट आंदोलन बार-बार उठ खड़ा हुआ है.
भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य राजेश यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने भारत को अमेरिका व इजराइल द्वारा थोपे गए युद्ध में भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, भारत को बेहद कड़ीवी रूप से, विनाशकारी हद तक पहुँचा दिया है. लगभग एक करोड़ मजदूर और प्रोफेशनल्स हैं, जो पश्चिम एशिया में काम करते हैं, वो जबरदस्त अनिश्चितता और असुरक्षा के साए तले रहने को विवश हैं. युद्ध ने भारत में इंधन और खाद का भारी संकट पैदा कर दिया है. लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए यह कोरोना काल के लौटने जैसे है, जहां महज जिंदा रहना ही बड़ी चुनौती बन जाता है. गहरे आर्थिक संकट और विदेश नीति की गहरी नाकामी का मेल, भारत में हमारे लिए नए दौर का आगाज कर रहा है और हमें इसका प्रतिरोध, साम्राज्यवाद विरोधी, फासीवाद विरोधी संघर्ष को भाकपा माले अगुआई करेगा। इस अवसर पर मंजूर आलम, विधा सिंह कुशवाहा, राम प्रवेश राम, श्रीराम शर्मा, श्रीराम कुशवाहा, ललन गुप्ता, रमेश बैठा, इन्द्र जीत राम, प्रदुम्न पासवान, सीता पाल आदि नेताओं ने भी अपना बिचार को रखा और संकल्प लिया।


