


प्रतिभागियों ने प्रस्तुत की अभिनय प्रतिभा।
बेतिया मोहन सिंह।
आरोही कला संस्कृति वेलफेयर ट्रस्ट, संस्कार भारती जिला इकाई, पश्चिमी चंपारण तथा कला संस्कृति विभाग के संयुक्त सौजन्य से आयोजित 10 दिवसीय अभिनय कार्यशाला का समापन समारोह मंगलवार को स्थानीय ऑडिटोरियम सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में कला, साहित्य, रंगमंच एवं समाजसेवा से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
समारोह के मुख्य अतिथि राकेश कुमार ने कहा कि अभिनय और रंगकर्म समाज को जागरूक करने का एक प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने प्रतिभागियों को निरंतर अभ्यास एवं समर्पण के साथ कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि ज्ञानेंद्र शरण ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण में कला की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा इस प्रकार की कार्यशालाएं युवाओं की प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच प्रदान करती हैं।
कार्यशाला के प्रशिक्षक अनूज नंद यादव ने दस दिनों के प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रतिभागियों ने अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन, भावाभिव्यक्ति एवं रंगमंच की बारीकियों का गंभीरता से अध्ययन किया। वहीं, प्रभात कुमार झा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न नाट्य प्रस्तुतियों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया गया, जिसकी उपस्थित दर्शकों एवं अतिथियों ने सराहना की। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर दिवाकर राय, प्रशांत सौरभ, आदित्य मधुकर, कुंदन शांडिल्य, अनिल बाबा पाठक, अरविंद मिश्रा, प्रीतम शुक्ला, संजीव मिश्रा, संतोष आनंद, अंशुमान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं भविष्य में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नियमित आयोजन के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त प्रशिक्षण प्रतिभागियों के कलात्मक एवं व्यक्तिगत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


