Wednesday, July 29, 2026
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मानदेय बंद, सेविकाओं का सब्र टूटा, आंगनबाड़ी कर्मियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का किया ऐलान

आंगनबाड़ी कर्मियों की हुंकार—अब आर-पार की लड़ाई, जिला मुख्यालय पर होगा बड़ा प्रदर्शन

मोबाइल नहीं, मानदेय नहीं, सुविधाएं नहीं… आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं का फूटा गुस्सा

सरकार की अनदेखी पर आंगनबाड़ी कर्मियों का बिगुल, जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

काम पूरा, हक अधूरा… आंगनबाड़ी कर्मियों ने विभाग पर लगाए गंभीर आरोप

डिजिटल काम का दबाव, लेकिन मोबाइल तक नहीं… सेविकाओं ने उठाई सुविधाओं की मांग

मानदेय, किराया और कंटिजेंसी राशि बकाया… एटक ने सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं का बड़ा एलान—हक नहीं मिला तो सड़कों पर होगा संघर्ष

अब चुप नहीं बैठेंगे… पश्चिम चंपारण में आंगनबाड़ी कर्मियों ने सरकार के खिलाफ भरी हुंकार

मानदेय नहीं, मोबाइल नहीं, सुविधाएं नहीं… आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं का फूटा गुस्सा, सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान

बेतिया मोहन सिंह।

पश्चिम चंपारण में बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (एटक) की जिला स्तरीय बैठक बलिराम भवन में जिला अध्यक्ष सीमा देवी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जिलेभर से पहुंची आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने सरकार और विभाग की कार्यशैली पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कई महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, लेकिन सरकार और विभाग उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के लगभग सभी कार्यों को डिजिटल कर दिया है, लेकिन आज तक सेविकाओं को न तो सरकारी मोबाइल उपलब्ध कराया गया और न ही मोबाइल खरीदने के लिए कोई राशि दी गई। इतना ही नहीं, मोबाइल रिचार्ज का खर्च भी सेविकाओं को अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है। केंद्र संचालन के लिए मकान किराया, हर वर्ष मिलने वाली कंटिजेंसी राशि तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं भी लंबे समय से नहीं दी जा रही हैं, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
बैठक में विशेष रूप से लौरिया परियोजना की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वहां अनियमितताओं ने सारी सीमाएं पार कर दी हैं। कई केंद्रों पर पोषाहार उपलब्ध नहीं होने के बावजूद सेविकाओं से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। जिन संसाधनों की जिम्मेदारी विभाग की है, उनकी कमी का ठीकरा सेविकाओं पर फोड़ा जा रहा है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम करती हैं। पोषण अभियान, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सर्वेक्षण और अन्य कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें सम्मानजनक सुविधाएं और समय पर मानदेय तक नहीं मिल रहा है। इससे पूरे तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार और विभाग ने शीघ्र ही लंबित समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा। जुलाई महीने में जिले के सभी परियोजना कार्यालयों पर प्रदर्शन कर मांग पत्र सौंपा जाएगा, जबकि अगस्त में जिला मुख्यालय पर विशाल प्रदर्शन आयोजित कर सेविका-सहायिकाओं की मांगों को जोरदार ढंग से उठाया जाएगा।
बैठक को संबोधित करते हुए एटक के जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश क्रांति ने कहा कि गरीबों, महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं के प्रति सरकार की उदासीनता बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं गांव-गांव जाकर सरकार की योजनाओं को सफल बनाती हैं, वही आज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। उन्होंने सेविका-सहायिकाओं से एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि अब अधिकार बिना संघर्ष के मिलने वाले नहीं हैं।
बैठक में जिला संगठन प्रभारी अजय वर्मा सहित सीता देवी, गोदावरी देवी, सरिता शुक्ला, पम्मी रानी, अर्पण राय, सुधा देवी, विभा देवी, संजू देवी, हसीना, मीना, परमिला, तब्बसुम, आनंद श्रीवास्तव, त्रिगुण देवी, विनय, राजा जी समेत बड़ी संख्या में सेविका-सहायिकाएं मौजूद रहीं। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा सरकार और विभाग को जवाबदेह बनाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।

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