Sunday, June 21, 2026
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महागठबंधन का चक्का जाम, सभी दुकानें रही बंद, बड़े-बड़े वाहन का परिचालन ठप – विधायक

राज्य में मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम और चार श्रम कोड को वापस ले सरकार- भाकपा माले

बेतिया मोहन सिंह।
मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ महागठबंधन ने लामबंदी तेज कर दी है। ऐसे में बुधवार को महागठबंधन की ओर से बिहार में चक्का जाम का ऐलान किया था। जहां आज सुबह से ही बेतिया के सभी प्रमुख सडको पर भारी संख्या में भाकपा माले, इंकलाबी नौजवान सभा, निर्माण मजदूर सभा, नगर सफाई कर्मचारी यूनियन, एक्टू, आशा कार्यकर्ता संघ, खेत व ग्रामीण मजदूर सभा, अखिल भारतीय किसान महासभा आदि संगठनों द्वारा जूलूस निकाल कर केन्द्र और राज्य सरकार की जमकर आलोचना किया। भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने सोवा बाबू चौक,कचहरी के सामने मुख्य सड़क, स्टेशन चौक पर सड़क जाम कर दो घंटों तक बंद रखा।
चक्का जाम के दौरान सड़कों पर बड़े-बड़े वाहनों का परिचालन ठप तक रहा, सभी दुकानें बंद रही।
भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा है कि इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग ने संविधान की व्याख्या करते हुए ऐसी पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू की है, जो असल में नागरिकता की जांच में बदल गई है। मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम और चार श्रम कोड को वापस लेना ही होगा, बीच का कोई रास्ता नहीं है।
भाकपा माले नेता सह अखिल भारतीय किसान महासभा जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने कहा की मोदी सरकार अपने फायदे के लिए दबाव डालकर गरीबों का नाम हटवा सकती है। उन्होंने कहा कि जब जनवरी में मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है तो फिर से प्रक्रिया शुरू करना संदेह पैदा करता है। इसलिए आयोग को तुरंत इस निर्णय को वापस लेना चाहिए। इंसाफ मंच जिला अध्यक्ष अखतर इमाम ने कहा कि एसआइआर के लिए अभी न तो पर्याप्त समय है और न ही दस्तावेज सभी नागरिकों के पास उपलब्ध हैं। कुछ वैध दस्तावेजों राशन-कार्ड, मनरेगा जाब-कार्ड आदि को स्वीकार नहीं करने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।
इंकलाबी नौजवान सभा जिला अध्यक्ष फरहान राजा ने कहा कि हम चुनाव आयोग के इस कदम के खिलाफ हैं। इन नियमों बार-बार नागरिकता साबित करनी होगी।
बिहार चुनाव से पहले लाए गए निर्वाचन आयोग के नए संशोधन नियमों का मुख्य लक्ष्य 2026 का बंगाल चुनाव है। नए फैसले से प्रवासी श्रमिकों को परेशानी होगी।
ऐक्टू जिला अध्यक्ष जवाहर प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि सरकार अपने फायदे के लिए दबाव डालकर दलितों, पिछडों, अल्पसंख्यकों का नाम हटवा सकती है।जब जनवरी में मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है तो फिर से प्रक्रिया शुरू करना संदेह पैदा करता है। इसलिए आयोग को तुरंत इस निर्णय को वापस लेना चाहिए। कार्यक्रम में भाकपा माले नेता मुखिया नवीन कुमार, सुरेन्द्र चौधरी,पलट मियां, विनोद यादव, संजय यादव, योगेन्द्र यादव, रिखी साह, अशोक महतों, जोखू चौधरी, विनोद कुशवाहा, धातु चौधरी, रामा राम, विनोद राम, रविन्द्र राम, वीरेंद्र पासवान, संजय राम, रूसतम, संजय मुखिया आदि नेताओं ने भी सभा को सम्बोधित किया।

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