Saturday, June 6, 2026
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मौजा महुअर और मौजा गुरवलिया के राजस्व कर्मचारी ऊपरी प्रभाव से बिना मौका मुआयना के हीं किसी भी भूमि सम्पदा को ऊपरी रसूखवालों के पक्ष में दे देते हैँ संस्तुति 

अमिट लेख के प्रधान संपादक ने सीओ ज्योति रानी से मिल बढ़ रहे फ़र्ज़ीवाड़े के विरुद्ध लगाम लगाने की मांग की 

एक विधायक के लगूओ-भगुओ के बल महुअर के विनोद सिंह नामक एक व्यक्ति के फ़र्ज़ीवाड़े के विरुद्ध अंचल कार्यालय में आपत्ति-पत्र डाला 

फर्जीवाड़ा कर निबंधन से जुड़ी जमीन को राजस्व कर्मचारी द्वारा लगाये पँख को सीओ ने आपत्ति-पत्र मिलने के बावजूद निरस्त करने के बजाए आम और ख़ास सूचना की सूची में किया कलमबद्ध

बेतिया मोहन सिंह।
पश्चिम चंपारण जिला के
बगहा-2 अंचल कार्यालय में पूर्व सीओ के चहेतों का गोरखधंधा नई और तेज तर्रार सीओ ज्योति रानी के कार्यकाल में भी किन्हीं ऊपरी रसूख रखनेवालों के हिमायती राजस्व कर्मचारियों के चलते अब भी फल और फूल रहा है। पैतृक सम्पति में 1/5 का हक़दार व्यक्ति समूल भू-सम्पदा ऐसे कर्मचारियों के बूते फर्जीवाड़े के इस खेल को आपसी मिलीभगत से दाखिल-ख़ारिज तक परवान पहुँचाने में कामयाब होने लगे हैँ। अंचल कार्यालय के टेबल रिपोर्टिंग के बूते ऐसे दावे अंचल निरीक्षक के पद पर जवाबदेह अधिकारी आँख मूंद स्वीकृत भी कर देते हैँ। यह कोई अभियोग नहीं अपितु बगहा-2 अंचल के ख़ास राजस्व कर्मचारी मौजा गुरवलिया के जगदीश राम द्वारा एक फर्जीवाड़े से जुड़े पैतृक भूमि जो आपसी बंटवारे में अन्य फरिकैन के जोत आबाद की जमीन है को विनोद सिंह जो उस भूमि में 1/5 का कानूनी हकदार है द्वारा अपने भतीजे रूपक सिंह को समूल रूप से निबंधित कर इन कर्मचारियों के सहयोग से ऑनलाइन अपडेट भी करा चुका है, जिसका केस नंबर – 630/2025-26 है।

जिसके विरुद्ध बगहा -2 अंचल कार्यालय में दिनांक 16/06/2025 को एक आपत्ति-पत्र अमरेश कुमार सिंह पे.- स्व. अम्बिका सिंह जो प्रसिद्ध अमिट लेख समाचार-पत्र के स्वामी और प्रधान संपादक हैँ के द्वारा जमा कर उसका पावती भी ले लिया गया है

तथा वर्तमान अंचल अधिकारी ज्योति रानी से मुलाक़ात कर उनको ऐन दिवस उक्त आशय और फर्जीवाड़े से जुड़े इस मामले का जानकारी भी दिया जा चुका है। बताते चले की ओझवलिया महुअर निवासी जमुना सिंह के दो पुत्र क्रमशः हरिहर सिंह और अम्बिका सिंह थे। वर्ष 1981-82 में आपसी बंटवारे में जमुना सिंह पे. रामस्वरूप राय द्वारा अर्जित समस्त भू सम्पदा में से छलावे के तहत अम्बिका सिंह को महज 1/3 का हिस्सा जीवन यापन के लिये दे दिया गया। इसमें जमुना सिंह के दोनों पुत्रों के नाम से कुछ भूमि एक दूसरे फरिकैन को इस आशय से सौंपा गया की कालांतर में अपने-अपने नाम की जमीन एक दूसरे को तयशुदा हक़दारी के हिसाब से विधि सम्मत निबंधित कर देंगे। परन्तु लगभग 35-40 वर्ष पूर्व जमुना सिंह के बड़े पुत्र हरिहर सिंह अपने नाम का एक भू-खंड जो मौजा-महुअर स्थित है और जो आपसी बंटवारे में अम्बिका सिंह के हिस्से में था को चोरी-चुपके पैसा लेकर अपने नाम की जमीन होने का लाभ लेते हुये रामचंद्र साह पे. प्रसाद साह को निबंधित कर दिया तब से आपसी बंटवारे से जुड़े सहमति-पत्र का वजूद समाप्त मान अम्बिका सिंह द्वारा अपने नाम की जमीन जो अन्य फरिकैन के हिस्से में पंचो द्वारा मुकर्रर की गई थी को निबंधित अथवा स्थानांतरण किसी अन्य फरिकैन के नाम नहीं किया गया। उल्लेखनीय है की चुकी जमुना सिंह आपसी बंटवारे के बाद भी अपने बड़े पुत्र हरिहर सिंह के साथ रहते थे, लिहाजा समस्त भूमि से जुडा खतियान, रसीद, दस्तावेज हरिहर सिंह के दखल-कब्जे में रहा। जिसका लाभ लेते हुये जमुना सिंह द्वारा अर्जित भू-सम्पदा में कागजी हेरा फेरी कर कुछ नामी- बेनामी जमीन को विनोद सिंह द्वारा एक स्थानीय अमीन और किन्ही राजस्व कर्मचारियों के मेल से फर्जी कागजात तैयार करा लिया गया है तथा जिसे अब निरंतर उपयोग में लाने की कोशिश की जा रही है। बाबू जमुना सिंह की मृत्यु पश्चात् हरिहर सिंह अम्बिका सिंह से मेल कर कुछ जमीन बिना बंटवारे का बिक्री करा उसका कीमत भी आपस में बाँट लिये। शायद इस कारण भी किसी पक्ष द्वारा ऐसे कृत्यों के खिलाफ विरोध नहीं जताया गया। अमिट लेख को जानकारी देते हुये मौजा गुरवलिया के कुछ किसानों ने हल्का के राजस्व कर्मचारी जगदीश राम पर अभियोग लगाया है की वे, कागजी हेरा फेरी के मास्टर व्यक्ति हैँ जिनकी करगुजारी से कई मामले माननीय न्यायालय में अकारण लंबित हैँ। बहरहाल, विनोद सिंह के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने हेतु “अमिट लेख” के माध्यम से बगहा-2 अंचल अधिकारी का ध्यान मौजा गुरवलिया के खाता-23, खेसरा- 22 तथा जमाबंदी-22 और मौजा महुअर के खाता-32, खेसरा-464, जमाबंदी 32 जो 11 एकड़ 15 डिसमिल अमिबका सिंह पे. जमुना सिंह के नाम पर ऑनलाइन प्रदर्शित है में गलत प्रपत्रों के आधार पर विनोद सिंह द्वारा करवाये जा रहे हेरा फेरी के विरुद्ध आकृष्ट कराना है। देखना है ऊपरी रसूख वालों को नई सीओ क़ानून का पाठ पढ़ाती हैँ या आपत्ति पत्र के बावजूद यह मामला अनायास कानूनी झमेले में अटकाया जाता है। हालांकि, इस आशय से जुड़ी एक सूचना सीओ बगहा2 के शिकायत व्हाट्सअप नंबर पर बीते दिवस भेजा भी जा चुका है।

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