Monday, May 4, 2026
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आशा कार्यकर्ताओं को मिली प्रोत्साहन राशि में वृद्धि, पर बैठक में जताई नाराजगी, महंगाई में ऊंट के मुंह में जीरा।

बेतिया में बिहार राज्य आशा संघ एटक की बैठक सम्पन्न, 26 हजार मानदेय की मांग दोहराई गई।

बेतिया मोहन सिंह।
बिहार राज्य आशा संघ एटक की एक महत्वपूर्ण बैठक आज बेतिया के बलिराम भवन सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता एटक के वरिष्ठ नेता देवेंद्र पांडेय ने की। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को विभिन्न कार्यों के लिए दी जाने वाली 2000 रुपए की राशि को बढ़ाकर 3500 रुपए और बिहार सरकार द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन राशि को 1000 से बढ़ाकर 3000 रुपए किए जाने का स्वागत किया गया।

हालांकि इस वृद्धि को “अल्प” बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि इतनी मामूली राशि से आशा कार्यकर्ताओं का घर-परिवार चलाना संभव नहीं है। बैठक में वक्ताओं ने साफ कहा कि यह राशि महंगाई के मुकाबले बेहद कम है और न्यूनतम मजदूरी के स्तर से भी नीचे है।

यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा है” – ओम प्रकाश क्रांति

बैठक को संबोधित करते हुए बिहार राज्य आशा संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश क्रांति ने कहा, आज के समय में जितना काम आशा से लिया जा रहा है, उसके बदले केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भी मात्र 220 रुपये प्रतिदिन दे रही है। यह ऊंट के मुंह में जीरा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अगर बिहार में चुनाव नहीं होता, तो यह वृद्धि भी नहीं की जाती। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि आंदोलन और हड़ताल के वर्षों बाद भी सरकार ने आशा की मांगों को नजरअंदाज किया, और अब चुनावी मजबूरी में “रेवड़ी” बांटी जा रही है। क्रांति ने कहा कि जब तक आशा और आशा फैसिलिटेटर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर कम-से-कम ₹26,000 मानदेय की गारंटी करनी चाहिए।

संघर्ष का नतीजा बताया गया प्रोत्साहन में वृद्धि

बैठक में यह भी कहा गया कि प्रोत्साहन राशि में यह वृद्धि बिहार राज्य आशा संघ के निरंतर आंदोलन का परिणाम है। 23 जुलाई को पटना में हुए विशाल प्रदर्शन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक सूर्यकांत पासवान द्वारा विधानसभा में लगातार मुद्दा उठाने को इस उपलब्धि का प्रमुख कारण बताया गया। संघ ने विधायक सूर्यकांत पासवान के साथ-साथ प. चम्पारण के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं आशा डीसीएम राजेश कुमार को भी धन्यवाद दिया, जो समय-समय पर आशा की मांगों को सरकार तक पहुंचाने में सहयोग करते रहे हैं।

किसान नेताओं ने भी दिया समर्थन

बैठक को संबोधित करते हुए जिला किसान नेता राधामोहन यादव एवं बब्लू दूबे ने आशा कार्यकर्ताओं के संघर्ष को सराहा और आंदोलन को नैतिक समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता देश की स्वास्थ्य रीढ़ हैं, जिन्हें उनके श्रम का उचित मूल्य मिलना चाहिए।

संघटन को मजबूत करने और भविष्य की रणनीति पर चर्चा

बैठक में संगठन को मजबूत करने, आगामी आंदोलनों की रणनीति पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने आशा कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और अपने अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी की अपील की। यह भी कहा गया कि सच्चे हितैषियों की पहचान करें और उन्हीं के साथ मिलकर संघर्ष को आगे बढ़ाएं।

बैठक में साधना देवी, पुष्पा देवी, बेनू देवी, सरोज, रंजना, मुन्ना, जरीना, लछमीना, शोभा, उर्मिला, पूनम, जैबुन, बबीता, रीना, बासमती, सुनीता, मुन्नी समेत कई आशा कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

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