Saturday, June 6, 2026
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लाखों के आस्था केंद्र के साथ वास्तु व शिल्पकला की अद्भुत धरोहर कालीबाग मंदिर का शीघ्र ही शुरू होगा जीर्णोद्धार:गरिमा

बोली महापौर उनके महीनों के अथक प्रयास के बाद कालीबाग परिसर के सभी मंदिरों के मूल स्वरूप सुरक्षित रखते हुए होगा जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण,

बीते साल ही लाखों की लागत से मंदिर परिसर की चहारदीवारी के साथ प्रवेश द्वार के नवनिर्माण नगर निगम से पूरा होने की भी दी जानकारी,

बेतिया मोहन सिंह। महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने बताया कि अनुरोध पत्र के साथ उनके अथक प्रयास से बेतिया राजकालीन दुर्लभ धरोहरों में शामिल ऐतिहासिक कालीबाग के सभी मंदिरों के जीर्णोद्धार तथा सौंदर्यीकरण की अनुमति मिली है। महापौर ने यह भी बताया कि संपूर्ण हिंदू समाज के लिए आध्यात्मिक महत्व वाले आस्था के केंद्र के साथ वास्तु व शिल्पकला की अद्भुत कलाकृतियों से सुसज्जित इस मंदिर परिसर की जर्जर चहारदीवारी के नव निर्माण के साथ मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार का निर्माण उनके प्रयास से नगर निगम द्वारा बीते साल ही पूरा किया जा चुका है।
अब राजस्व परिषद बिहार के माननीय अध्यक्ष केके पाठक से प्राप्त लिखित अनुमति पत्र के आलोक में कालीबाग मंदिर परिसर के प्रत्येक मंदिरों का जीर्णोद्धार कराने के लिए उन्होंने अपनी पहल तेज कर दी है। नगर आयुक्त विनोद कुमार सिंह और नगर निगम के अभियंता सुजय सुमन के साथ पूरे मंदिर का अवलोकन करने के बाद महापौर श्रीमती सिकारिया ने बताया कि दशकों से राज प्रबंधन और राजनीतिक नेतृत्व के द्वारा उपेक्षित रहा यह ऐतिहासिक धरोहर उचित रख रखाव के अभाव में जर्जर हो ध्वस्त होने के करीब पहुंच चुका है। जिसको बेतिया राज कालीन इस धरोहर के बुनियादी स्वरूप को सुरक्षित संरक्षित रखने के साथ राजस्व परिषद, बिहार के मालिकाना हक बरकरार रहने की शर्त के साथ मंदिर परिसर के संपूर्ण भवनों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए अनाप्ति के साथ मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिए जाने का आदेश जारी हुआ है। महापौर श्रीमति सिकारिया ने बताया कि 19 वीं सदी में निर्मित यह मंदिर दशकों से लाखों श्रद्धालुजन के लिए प्रबल आस्था का केंद्र रहा है। पुरातात्विक,आध्यात्मिक और पर्यटनिक महत्व वाले इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के अपने अभियान में महापौर ने संपूर्ण जनता जनार्दन से भी सहयोग की अपील की। महापौर श्रीमति सिकारिया ने बताया कि कालीबाग मंदिर प्रांगण के मुख्य मंदिर के साथ अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों की भी हालत बेहद खराब है। प्रायः सबकी छत बरसात में टपकती है। अगर जल्दी ही इसके तरफ ध्यान देने के साथ इनके जीर्णोद्धार और रख रखाव का उचित प्रबंध नहीं किया गया तो यह धरोहर ध्वस्त हो जायेगा। महापौर के साथ पहुंचे नगर आयुक्त विनोद कुमार सिंह ने बताया कि स्थानीय जानकार और बुजुर्ग लोगों के द्वारा 19 वीं सदी के मध्य काल में इस मंदिर का निर्माण होना बताया गया है। इस ऐतिहासिक प्रतीक धरोहर को बचाने के लिए तत्काल पहल जरूरी है। वही नगर निगम के अभियंता सुजय सुमन ने बताया कि मंदिर परिसर के कुछ छतों की मरम्मती जन सहयोग से हुई है। उसकी जगह भी नया निर्माण कराना जरूरी दिख रहा है।

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