Sunday, June 14, 2026
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गंडक में अनियंत्रित खनन से बी-गैप तटबंध पर संकट, बढ़ा बाढ़ का खतरा

भारत-नेपाल समझौते के बावजूद सुस्ता गांव पालिका क्षेत्र में जारी खनन, भारी वाहनों के आवागमन से तटबंध की सुरक्षा पर उठे सवाल

बेतिया/ पश्चिमी चंपारण (मोहन सिंह)
गंडक नदी के दाएं किनारे पर भारत-नेपाल द्विपक्षीय समझौता 1959 के अंतर्गत निर्मित बी-गैप तटबंध एवं अन्य सुरक्षा बांध नेपाल के 84 गांवों की लगभग 75 हजार आबादी को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। यह तटबंध वाल्मीकि बैराज के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में इस प्रकार निर्मित है कि गंडक नदी तटबंध पर सीधे प्रहार करते हुए लगभग 100 डिग्री के कोण पर दिशा परिवर्तित करती है, जिसके कारण बाढ़ के समय यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील हो जाता है।
58वीं गंडक उच्च स्तरीय स्टैंडिंग समिति ने निरीक्षण के बाद बी-गैप तटबंध के ठोकर संख्या 16 एवं 17 के मध्य तटबंध को सुदृढ़ करने तथा बिट्यूमिनस सड़क निर्माण की संस्तुति की थी। लेकिन गंडक नदी में अनियंत्रित खनन और भारी वाहनों के आवागमन के कारण यह कार्य प्रभावित हो रहा है। खनन गतिविधियों से तटबंध के संवेदनशील हिस्से पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
30 अप्रैल 2026 को काठमांडू में आयोजित नेपाल-भारत संयुक्त गंडक परियोजना की 11वीं बैठक में दोनों देशों के समन्वय से वैज्ञानिक तरीके से खनन कराने का निर्णय लिया गया था। बैठक में यह भी तय हुआ था कि खनन कार्य इस प्रकार किया जाए जिससे तटबंधों और नदी किनारे बसे गांवों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके बावजूद आरोप है कि सुस्ता गांव पालिका प्रशासन द्वारा बिना समुचित समन्वय के खनन कराया जा रहा है तथा भारी वाहनों का परिवहन भी जारी है।
इस संबंध में नवलपरासी के जिला अधिकारी एवं भू-अर्जन संपर्क अधिकारी शोभित हलुवाई तथा महराजगंज सिंचाई खंड-2 के अवर अभियंता रविंद्र यादव के बीच वार्ता हुई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि खनन केवल उन्हीं क्षेत्रों में कराया जाएगा जहां नदी के दोनों किनारे नेपाल की सीमा में स्थित हैं तथा तटबंधों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में जारी खनन गतिविधियां बाढ़ के खतरे को बढ़ा सकती हैं। वहीं सहायक अभियंता रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। नेपाल के जल स्रोत एवं सिंचाई विभाग, जावलाखेल, ललितपुर (काठमांडू) को भी पत्राचार कर खनन कार्य रोकने की मांग की गई है।

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