Sunday, May 31, 2026
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ब्रिटिश कालीन “मुसहर राम -राम-जानकी मंदिर” के सार्वजनिक भूखंड पर 53 लाख से बनेगा बहुउपयोगी सामुदायिक भवन:गरिमा

एक ही बस्ती में दर्जन भर ऐतिहासिक मंदिर स्थापित होने को लेकर महापौर ने पूरे कालीबाग क्षेत्र को बताया सार्वजनिक मंदिरों का मोहल्ला,

धार्मिक और सामाजिक हित में अपनी बास भूमि तक दान कर देने वाले स्वर्गीय मुसहर राम दंपत्ति को महापौर ने बताया दान पुण्य का अनूठे उदाहरण,

बेतिया मोहन सिंह।

महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने बताया कि ब्रिटिश कालीन “मुसहर राम राम जानकी मंदिर” के खाली पड़े सार्वजनिक भूखंड पर 52.93 लाख से अधिक की लागत से बहुउपयोगी सामुदायिक भवन का निर्माण नगर निगम प्रशासन द्वारा कराए जाने की स्वीकृति उनके प्रस्ताव पर नगर निगम बोर्ड ने दे दी है। शीघ्र ही ई.टेंडरिंग की निविदा प्रक्रिया के तहत एक बहुउपयोगी सामुदायिक भवन निर्माण कराया जाएगा। महापौर श्रीमती सिकारिया ने यह भी बताया कि दशकों से बदहाल और जर्जर “मुसहर राम-राम जानकी मंदिर” का जीर्णोद्धार भी कराया जाएगा। ताकि सार्वजनिक हित में आज करोड़ों रुपए मूल्य की अपनी बास भूमि को दान कर देने वाले उस नि:संतान दंपति के कृतित्व आगे की पीढ़ियों के लिए यादगार बनाया जा सके। मुहल्ले वासियों से मिली जानकारी साझा करते हुए महापौर श्रीमती सिकारिया ने बताया कि कालीबाग मोहल्ला के ही जंगी महावीर मंदिर के समीप ही अवस्थित महात्मा मुसहर राम-राम जानकी मंदिर का ब्रिटिश कालीन और गौरवशाली इतिहास है।
1940 के दशक में निः संतान मुसहर राम दंपत्ति ने करीब साढ़े तीन कट्ठा विस्तार वाले बास भूमि को धार्मिक और सामाजिक हित दान कर दिया था। बाद के अपने जीवन काल में अपने पड़ोसी मित्रों की मदद से अत्यंत पिछड़ी जाति के रहे मुसहर राम के द्वारा राम जानकी मंदिर का निर्माण कराने के बाद उसी मंदिर को मुसहर राम दंपत्ति ने आजीवन अपना आश्रय बनाए रखा। दंपति की मृत्यु हो जाने के दशकों बाद भी करोड़ों रुपए मूल्य का वह भूखंड सार्वजनिक है। महापौर श्रीमती सिकारिया ने अपनी बास भूमि तक दान कर देने वाले स्वर्गीय मुसहर राम दंपत्ति को दान पुण्य के अनूठा उदाहरण करार देते हुए बताया कि नगर निगम बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार मंदिर परिसर के खाली भूखंड सार्वजनिक संपदा के रूप में बहुउपयोगी सामुदायिक भवन निर्माण के साथ दशकों से जर्जर उक्त मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की कुल 52.93 लाख से अधिक की लागत वाली योजना का निर्णय नगर निगम बोर्ड द्वारा किया गया है। इसके साथ ही महापौर श्रीमती सिकारिया ने बताया कि एक ही बस्ती में दर्जन भर ऐतिहासिक मंदिर स्थापित होने को लेकर बेतिया नगर निगम क्षेत्र के कालीबाग को आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व सार्वजनिक धरोहर मंदिरों का मोहल्ला भी कहना कही से भी गलत नहीं हो सकता है।

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