




मझौलिया से बब्लु कुमार पटेल की रिपोर्ट
मझौलिया प्रखंड अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के परिसर में आयोजित 15 दिवसीय ‘समेकित पोषक तत्व प्रबंधन’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमाण पत्र वितरण के साथ समापन हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह शामिल हुए, प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के उपरांत प्रमाण पत्र वितरण कर किया. उन्होने अपने संभोधन कहा बीज और उर्वरक आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आते हैं, इसलिए किसानों को उचित मूल्य पर समय से इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना जिम्मेदारी है। साथ ही मिट्टी की सेहत सुधारना और उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। जिला पदाधिकारी ने कृषि विज्ञान केंद्र स्थित मशरूम प्रयोगशाला और समेकित कृषि प्रणाली इकाई का भ्रमण किया और इनके जानकारी को बारीकी से अवोलकन किया। उन्होंने केंद्र द्वारा चलाई जा रही प्रसार गतिविधियों को करीब से देखा और उनकी सराहना की। जिला पदाधिकारी ने कहा कि केंद्र द्वारा दी जा रही तकनीकी जानकारी और मशरूम बीज उत्पादन की दिशा में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने केंद्र की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित बताते हुए वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया साथ ही प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की. वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखना और किसानों को संतुलित पोषण की जानकारी देना है। डॉक्टर कुंदन किशोर अधिष्ठाता पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय ने कहा इस तरह के प्रशिक्षण से युवाओं और किसानों में तकनीकी दक्षता आएगी, जिससे जिले में टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने प्रतिभागियों को इस ज्ञान का उपयोग ग्रामीण स्तर पर कृषि विकास के लिए करने हेतु प्रेरित किया। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र माधोपुर के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार केवीके के उन्होंने मृदा स्वास्थ्य को भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुनिश्चित करने का एकमात्र उपाय बताया। इस अवसर पर राष्ट्रीय गोकुल मिशन के प्रभारी डॉ. राजीव कुमार अस्थाना के साथ-साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. चेलपुरी रमुलू, डॉ. हर्षा बी.आर., डॉ सौरभ दुबे और डॉ. जगपाल भी उपस्थित थे।


