
बेतिया मोहन सिंह।
25 जुलाई को बेतिया में आइसा और इन्कलाबी नौजवान सभा के आह्वान पर दिल्ली जंतर मंतर और पटना में छात्र युवाओं पर दमन के खिलाफ,धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने, पेपर लीक के दोषियों को सजा देने,एन टी ए भंग करने,नई शिक्षा नीति वापस लेने व अन्य मांगों पर हुआ बंद ऐतिहासिक रहा। दसियो हजार से अधिक बेतिया की सड़कों पर उतरे छात्र युवाओं ने धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो का नारा लगाया।छात्र पटना में कल हुई आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय ,सचिव दीपांकर मिश्रा, सबा आफरीन, दिव्यम, कुमार परवेज,और अन्य छात्र नेताओं समेत माले विधायक संदीप सौरभ की गिरफ्तारी और दिल्ली जंतर मंतर पर दमन से काफी आक्रोशित थे।छात्रों ने पटना और देश भर में गिरफ्तार नेताओं की बिना शर्त रिहाई की मांग की।बंद का नेतृत्व कर रहे इन्कलाबी नौजवान सभा और आइसा के नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि मोदी के 10 सालों के शासन काल में 152 परीक्षा के पत्र लीक हुए हैं जिसमें साढ़े सात करोड़ छात्र मानसिक व आर्थिक तौर पर प्रताड़ित हुए हैं।अभी neet पेपर लीक के बाद 20 नौजवानों ने आत्म हत्या कर लिया।मोदी सरकार ने 2017 में एन टी ए द्वारा परीक्षा लेने की व्यवस्था की ।जिसके कुछ बड़े पदाधिकारियों को छोड़कर बाकी सभी आउट सोर्सिंग कंपनियों के स्टाफ हैं।जिनका संबंध तमाम तरह के शिक्षा परीक्षा माफिया तंत्र से लेकर बड़े राज नेताओ तक है। जिससे सभी परीक्षा लीक हो रहा है।उन सभी लोगों के ही मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान हैं। छात्र नेताओं ने 2020 की नई शिक्षा नीति जो बिहार समेत पूरे देश में गरीब और आम जनता के परिवारों से आने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करने की साजिश है, उसको वापस लेने की मांग की। विश्वविद्यालय की पढ़ाई को डिग्री पढ़ाई से अलग कर खास अमीर वर्ग का उच्च शिक्षा पर कब्जा करना आम जनता पर अमीरों के लिए गुलामी का राज कायम करना है।छात्र नेताओं ने छात्रों पर हुए दमन के जिम्मेवार दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पद मुक्त करने की भी मांग।बंद के दौरान बेतिया समाहरणालय चौक कई घंटों तक जाम रहा।


