
11 अप्रैल 26 को कानपुर उत्तर प्रदेश के मोती झील स्थित प्रमिला सभागार में क्रांति स्मृति संरक्षण समिति द्वारा आयोजित क्रांतिकारी सुरेंद्र पांडेय जयंती समारोह में चंपारण के क्रांतिकारी कमलनाथ तिवारी के प्रपौत्र हरिअक्ष कमलनाथ को न्यायमूर्ति अनिल वर्मा जी द्वारा अंगवस्त्र दे कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि कानपुर विधायका ने कमलनाथ तिवारी के आज़ादी के दिए गए योगदान को याद कर उनकी उपलब्धियों को नमन किया। विशिष्ठ अतिथि माननीय न्यायमूर्ति अनिल वर्मा जी ने बताया कि मुलैनीय डकैती के बाद कमलनाथ तिवारी जी को गिरफ़्तार कर आगरा ले जाने के क्रम में उन्हें कानपुर के रेलवे कारागार में रखा गया था। चूँकि वो संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य थे इसलिए उन्हें छुड़ाना चंद्रशेखर आज़ाद के लिए काफ़ी ज़रूरी था। जिसके लिए वो कानपुर आए थे, कानपुर स्टेशन पर पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती थी इसीलिए कानपुर एक्शन प्लान को छोड़ दिया गया। आज़ाद को डर था कि कहीं क्रॉसफ़ायर में कमलनाथ तिवारी को गोली ना लग जाये। महान क्रांतिकारी अश्फ़कुलाह ख़ान जी के पौत्र (व उनके हमनाम) अश्फ़ाकुलाह ख़ान ने कहा कि क्रांतिकारी कमलनाथ तिवारी की जीवन गाथा हम सबके लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने बॉस्टन और लाहौर जेल में भूख हड़ताल में भगत सिंह का साथ दिया था और काला पानी में बटुकेश्वर दत्त के साथ पुनः अनशन का नेतृव किया था। आज़ादी के बाद अपने संसदीय जीवन में उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में भी अहम योगदान दिया।


