

बेतिया मोहन सिंह।
11 फरवरी 26 जिला समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में VB-GRAMG के तहत “भ्रम बनाम तथ्य तथा रोजगार से परिसंपत्ति तक विषय पर उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन (भा.प्र.से.), की अध्यक्षता में मीडिया संवाद की गई। संवाद कार्यक्रम में निदेशक NEP. (डी०आर०डी०ए०) श्री पुरुषोत्तम त्रिवेदी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा), कार्यपालक अभियंता (मनरेगा), जिला के सभी इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट मीडिया कर्मी, आदि उपस्थित थे।
संसद द्वारा हाल ही में पारित “विकसित भारत- रोज़गार और आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है। यह अधिनियम विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, रोज़गार सुरक्षा प्रदान करने तथा आजीविका के स्थायी अवसर सृजित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
इस नए अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को, जो अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के वेतन रोज़गार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। यह प्रावधान पहले की 100 दिनों की सीमा से आगे बढ़कर ग्रामीण श्रमिकों को अधिक आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराता है। यदि निर्धारित समय-सीमा में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकार द्वारा बेरोज़गारी भत्ता स्वतः देय होगा, जिससे रोज़गार का अधिकार वास्तविक और प्रभावी रूप में लागू होगा।
अधिनियम के अंतर्गत जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम की चुनौतियों से निपटने से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। सभी कार्य विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से ग्राम सभा की सहभागिता से तय किए जाएंगे, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास सुनिश्चित हो सके।
मज़दूरी का समय पर भुगतान, देरी की स्थिति में मुआवज़ा, तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण तथा सशक्त सोशल ऑडिट व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया गया है। यह अधिनियम ग्रामीण बेरोज़गारी कम करने के साथ-साथ गांवों में सतत विकास, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करता है। आधार पंजीकरण के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता बढती है।
इस विधान के अंतर्गत शुरू किये जाने वाले सभी कार्य एवं परियोजनाएँ विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक का अंग होगी, जिनमे जल-संबंधी कार्यों के माध्यम से जल सुरक्षा, मूलभूत अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना तथा प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के शमन हेतु कार्यों का प्राथमिकता दी जाएगी। राज्यों को बुआई और कटाई के व्यस्ततम समय के दौरान 60 दिनों तक योजना की गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने की अनुमति देने वाला प्रावधान कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त श्रम उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
केंद्र सरकार और राज्य / संघ राज्य क्षेत्रों के सरकारों के बीच निधि-साझेदारी की पद्धति पूर्वोतर राज्यों तथा हिमालयी राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 90:10 तथा अन्य राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 60:40 होगी।
राष्ट्रीय स्तर की एक संचालन समिति योजना का समग्र पर्यवेक्षण करेगी तथा मानक आवंटनो के अनुमोदन एवं अधिनियम के अंतर्गत विनिर्दिष्ट अन्य कार्यों के लिए उत्तरदायी होगी। राज्य संचालन समिति को राज्य में योजना के कार्यान्वयन का क्षेत्राधिकार होगा तथा यह राष्ट्रीय स्तर पर जारी निर्देशों के अनुरूप राज्य-विशिष्ट पर्यवेक्षण, निगरानी एवं नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
ग्राम पंचायत की प्राथमिक कार्यान्वयन भूमिका होगी तथा वह श्रमिकों का पंजीकरण करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने तथा कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के निष्पादन के लिए उत्तरदायी होगी। ग्राम सभा नियमित सामाजिक अंकेक्षण भी करेगी। मध्यवर्ती पंचायतों, ब्लॉक स्तरीय आयोजन, प्रस्तावों के समेकन एवं अभिसरण के सुगमीकरण पर ध्यान केन्द्रित करेगी। जिला पंचायतें, एक समर्पित संचालन समिति के माध्यम से, समग्र पर्यवेक्षण एवं निगरानी की जिम्मेदारी निभाएंगी तथा समेकित जिला योजनाएँ तैयार करने में जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) की सहायता करेंगी।
पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, स्थानिक प्रौद्योगिकी आधारित (स्पैटियल टेक्नोलॉजी) आयोजना, मोबाइल एवं डैशबोर्ड आधारित निगरानी तथा साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण प्रणालियों के माध्यम से प्रावधान किये जायेंगे। डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डेटा आधारित नियोजन व्यवस्था को अपनाने से परिचालन दक्षता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व में सुधार होगा।


