


मझौलिया से बब्लु कुमार पटेल की रिपोर्ट
मझौलिया प्रखंड अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के द्वारा किसानों की खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं संसाधन-सक्षम बनाने के उद्देश्य से लैंड लेज़र लेवलर तकनीक पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को लैंड लेज़र लेवलर की कार्यप्रणाली, उपयोग विधि एवं लाभों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। साथ ही प्रशिक्षण के उपरांत किसानों के खेतों पर जाकर लैंड लेज़र लेवलर के माध्यम से खेतों का वैज्ञानिक ढंग से समतलीकरण भी कराया जा रहा है।इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, सिंचाई जल का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना तथा फसल उत्पादन लागत को कम करना है। खेतों का समुचित समतलीकरण होने से सिंचाई के दौरान जल का समान वितरण होता है, जिससे फसलों की बढ़वार एकरूप होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।कार्यक्रम के उद्देश्य
किसानों को लैंड लेज़र लेवलर तकनीक का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना
खेतों का वैज्ञानिक समतलीकरण कर जल उपयोग दक्षता बढ़ाना
फसल उत्पादन में समानता एवं उत्पादकता में वृद्धि करना
खेती की लागत को कम कर किसानों की आय बढ़ाना
आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों को खेत स्तर तक पहुँचाना
लैंड लेज़र लेवलर तकनीक का महत्व लैंड लेज़र लेवलर तकनीक से खेत पूर्णतः समतल हो जाते हैं, जिससे सिंचाई जल का समान वितरण संभव हो पाता है। इस तकनीक के उपयोग से 20–30 प्रतिशत तक जल की बचत होती है तथा उर्वरकों का बेहतर और संतुलित उपयोग किया जा सकता है। समतल खेतों में बीज अंकुरण बेहतर होता है, खरपतवार की समस्या कम होती है तथा फसल की बढ़वार एकसमान रहती है, जिससे अंततः उपज में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त समय, डीज़ल एवं श्रम की भी बचत होती है, जिससे खेती अधिक किफायती बनती है।कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में कृषि में नई एवं उन्नत तकनीकों को अपनाना समय की मांग है। लैंड लेज़र लेवलर जैसी आधुनिक तकनीक न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


