Thursday, April 23, 2026
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भाकपा (माले) ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया*

इस अवसर पर गांधीजी के विचारों और उनके संघर्ष को याद किया।

बेतिया मोहन सिंह।

30 जनवरी 26 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर
भाकपा (माले) ने बेतिया हरी बाटीका चौक पर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि सभा किया।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि नफरत की विचारधारा ने ही महात्मा गांधी की हत्या की थी और दुर्भाग्यवश आज वही नफरत की राजनीति देश में फिर से मजबूत की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र में बैठी मोदी सरकार रोज़ नफरत और विभाजन की राजनीति को बढ़ावा दे रही है, जिससे देश की एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।
आगे कहा कि आज संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। हाल ही में यूजीसी से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का प्रचार नियमावली पर रोक ऐसे समय में लगाईं है, जब देश की यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों में जाति, लिंग और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, इस तरह की रोक हाशिए के छात्रों की उम्मीदों पर गहरी चोट है। यह नियम किसी एक दिन में नहीं बने थे, बल्कि वर्षों से चले आ रहे छात्र आंदोलनों, सामाजिक संघर्षों और संस्थागत भेदभाव के खिलाफ उठी आवाज़ों का नतीजा थे। रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसी घटनाओं ने यह साफ़ कर दिया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सिर्फ़ संवैधानिक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन-मरण का सवाल बन चुकी है। यूजीसी के नए नियमों पर पूरी तरह रोक लगाना सही नहीं है। सरकार इन नियमों को और मज़बूत, स्पष्ट और जवाबदेह बनाए, न कि उन्हें अधर में लटकने दे।
यह दर्शाता है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था पर भी मनमाना और दमनकारी नियंत्रण थोपना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार को अत्याचार करने और जनता की आवाज़ दबाने के लिए खुली छूट चाहिए?
भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुनील कुमार राव ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार—अहिंसा, सत्य, सामाजिक न्याय और भाईचारे—आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। भाकपा (माले) देश में बढ़ती नफरत, दमन और तानाशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ संघर्ष तेज़ करेगी और गांधीजी के सपनों वाले समतामूलक, लोकतांत्रिक भारत के निर्माण के लिए लगातार आंदोलन करती रहेगी। इनके अलावा फरहान राजा, सलामत, नवीन कुमार, जोखू चौधरी, सुरेन्द्र चौधरी, हारून गद्दी, जितेन्द्र राम, राजकुमार, संजय यादव, विरेन्द्र पासवान, मंगल चौधरी, मुस्तफा आदि नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया।
सभा के अंत में गांधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नफरत की राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया।

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