Thursday, April 16, 2026
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जिसके भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ी लड़ाई लड़कर हटवाया और करीब तीन करोड़ का भुगतान रोका उसके ही द्वारा मुझे भ्रष्ट बताने की किसी भी जांच के लिए तैयार:गरिमा

अपनी ही शिकायत पर हटाई गई पूर्व आउटसोर्सिंग सफाई एजेंसी “पाथेय” के एमडी द्वारा स्वयं को भ्रष्टाचार में लिप्त बताने पर भड़की नगर निगम की महापौर,

अपने व्यक्तित्व और आठ वर्षों के सार्वजनिक जीवन को गरिमा देवी सिकारिया ने बताया शत प्रतिशत निर्भीक और निदाग,

कालिख की कोठरी कही जाने वाली राजनीति में रहते जनता जनार्दन का बड़ा भरोसा और अपनी लोकप्रियता पर जताया गर्व,

बेतिया मोहन सिंह।

अपनी ही शिकायत पर नगर निगम से हटाई गई पूर्व आउटसोर्सिंग सफाई एजेंसी “पाथेय” के एमडी द्वारा स्वयं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने पर महापौर गरिमा देवी सिकारिया भड़क उठीं। उन्होंने कहा कि मेरा व्यक्तित्व और करीब आठ वर्षों का सार्वजनिक राजनीतिक जीवन शत प्रतिशत निदाग है। महापौर श्रीमति सिकारिया ने कहा कि अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोप को लेकर किसी भी उच्च स्तरीय जांच की मैं स्वयं ही मांग कर रही हूं। महापौर ने अपने राजनीतिक विरोधियों की कुत्सित सोच और समझ को हास्यास्पद करार देते हुए उन पर सवाल भी उठाया। महापौर श्रीमति सिकारिया ने बताया कि नगर निगम चुनाव से ठीक पूर्व प्रशासक काल के दौरान तत्कालीन नगर आयुक्त शंभू कुमार और अन्य की सांठ गांठ कर के पाथेय एजेंसी नगर निगम में गैर वैधानिक एग्रीमेंट के आधार पर काबिज हो गई थी। उसके और तत्कालीन नगर आयुक्त
के भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ी लड़ाई लड़कर मैंने ही पाथेय को नगर निगम से हटवाया ही नहीं बल्कि उसके करीब तीन करोड़ के भुगतान को भी जांच होने तक स्वयं रोका। इसको लेकर डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से पूर्व पाथेय एजेंसी ने हमारे निगम के विरुद्ध मुकदमा भी पटना के माननीय उच्च न्यायालय में किया है, जो अभी लंबित है । आज उसके ही द्वारा मुझे भ्रष्ट या भ्रष्टाचार में लिप्त बताने की किसी भी जांच के लिए मैं तैयार हूं। इसके साथ ही महापौर ने बताया कि मेरे निजी ड्राइवर दारा सिंह पर पैसा लेने की बात सोशल मीडिया पर उजागर होने की जानकारी मिली है। आवश्यकताअनुसार इसकी भी जांच सक्षम एजेंसी द्वारा की जाएगी। जांच होने तक मैंने अपने ड्राइवर को भी अपने काम से हटा दिया है। इसके साथ ही अपने राजनीतिक विरोधियों से मैं पूछना चाहूंगी कि आखिर किसी के स्टाफ के गलती करने में उक्त व्यक्ति या उसके परिवार की इसमें संलिप्तता कैसे संभव है? उस आदमी की नगर निगम प्रशासन में कोई भूमिका या भागीदारी भी नहीं है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि भ्रष्टाचार में लिप्त कोई व्यक्ति या संस्था द्वारा मामूली रकम का भी आखिर किस उद्देश्य से भुगतान किया गया है? इसके साथ ही पाथेय एजेंसी के खिलाफ लम्बित मामले को तेजी से पूरा करने की मांग करती हूं।

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