Friday, June 5, 2026
Homeबिहारबिहार के शिक्षकों का दर्द: 8 हजार में कैसे चलेगा घर? अब...

बिहार के शिक्षकों का दर्द: 8 हजार में कैसे चलेगा घर? अब रात में कर रहे यह काम

अमित कुमार भले ही पार्ट-टाइम टीचर हैं लेकिन घर खर्च इस महंगाई में नहीं चल पाने के कारण वह डबल काम करते हैं। दिन में वह पार्ट-टाइम टीचर का काम करते हैं तो रात में वह फूड डिलेवरी एजेंट के रूप में घर-घर पार्सल पहुंचाते हैं। केवल अमित ही नहीं, तमाम ऐसे युवक जोकि उम्र के एक मोड़ पर पहुंच चुके हैं और पार्ट-टाइम टीचिंग कर रहे हैं, वह अपनी आजीविका चलाने के लिए साइड वर्क कर रहे हैं। अमित कुमार बताते हैं कि घर खर्च चलाना जब मुश्किल हो गया था तो अपनी पत्नी की सलाह मानते हुए फूड डिलेवरी एजेंट के रूप में जोमैटो पर रजिस्ट्रेशन कराया और अब पार्सल रात में बांटता हूं।

अमित बताते हैं कि 2.5 साल बाद भी उन लोगों की सैलरी महज 8 हजार रुपये ही है। एक रुपया अभी तक नहीं बढ़ी जबकि उनके ही स्कूल में दूसरे टीचर 42 हजार रुपये सैलरी निकाल रहे हैं। यह उन लोगों की सैलरी के पांच गुना है। एक ही काम के लिए दो-दो सैलरी स्ट्रक्चर? कैसे कोई अपनी जीविका चला पाएगा।

8 हजार की सैलरी भी नहीं मिलती समय से

केवल कम सैलरी की ही बात नहीं है। पार्ट-टाइम शिक्षकों की सैलरी में भी लेटलतीफी इन पर भारी पड़ती है। अमित जैसे सैकड़ों टीचर ऐसे हैं जोकि चार महीना से अपनी 8 हजार रुपये सैलरी का इंतजार कर रहे हैं। एक तो कम पे और दूसरा कई-कई महीनों बाद उसका क्रेडिट होना? कोई भी व्यक्ति कैसे अपनी आजीविका चला पाएगा? नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक बताते हैं कि उधारी भी अब कोई नहीं देता। पहले बहुत सम्मान मिलता था समाज में लेकिन अब लोग मुंह फेर लेते हैं। सबको असलियत पता है कि उन जैसे शिक्षकों की हालत क्या है। कुछ दोस्त या परिचित ऐसे हैं जो मदद कर देते हैं लेकिन कोई कितनी बार किसी से मदद ले।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments

Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes