
बेतिया (तीसरी आंख)।सच्चे पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं तथाकथित पत्रकार!
पत्रकारिता के कोई मंच नहीं, अब टोटल जो है पुलिस की समर्थन और विरोध का मंच बन गया है।आखिर किस कारण से भारत नेपाल बोर्डर से लेकर नगर तक कुछ लोग पुलिस की इर्द गिर्द चक्कर काट रहे हैं,इसका कारण क्या है? इसका कारण वरीय पदाधिकारियों को खोजना होगा!
वरीय पदाधिकारियों के साथ फोटो खिंचवा के अपने वर्चस्व बढ़ाने के लिए,अपना फोटो डालते इधर उधर!
तथाकथित पत्रकारिता के सच्चे पत्रकार के भी दूरी बन गया हैं पुलिस
इस पर वरीय पदाधिकारियों की कारण का पता करना चाहिए!
पत्रकारिता के कोई मंच नहीं, अब टोटल जो है पुलिस की समर्थन और विरोध का मंच बन गया हैं,आखिर किस कारण से भारत नेपाल बोर्डर से लेकर नगर तक कुछ लोग पुलिस की इर्द गिर्द चक्कर काट रहे हैं,इसका कारण क्या है? इसका कारण वरीय पदाधिकारियों को खोजना होगा!
वरीय पदाधिकारियों के साथ फोटो खिंचवा के अपने वर्चस्व बढ़ाने के लिए,अपना फोटो डालते इधर उधर!
तथाकथित पत्रकारिता के सच्चे पत्रकार के भी दूरी बन गया हैं पुलिस
इस पर वरीय पदाधिकारियों की कारण का पता करना चाहिए!


